क्यू

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चले हैं

ख़ुद के घर की दिवाल तोड़ कर दूसरों का घर बनाने चले है
खुद सोते है नींद की दवा खा कर दूसरे को सूकून की नींद सुलाने चले है

🇮🇳

ख़ैर सच जो भी हो,
रिपब्लिक-डे की शुभकामनाएँ !
जय हिंद जय भारत 🇮🇳🇮🇳🇮🇳

मैंने उनके आने की उम्मीद खो दी थी क्यो की जब आखिरी बार हमारी नज़रे मिली थी तो वो मुस्कुराये नही थी एक दिन मैं अपनी ज़िंदगी का बोझ लिए किसी रास्ते पे जा रहा रहा था फिर उन्हों ने अचानक से मेरी कंधे पर हाथ रखा मैंने पलट कर देखा तो मुझे लगा कि मैं सपना देख रहा रहा हू फिर अचानक उनकी आवाज़ मेरे कानों से होती हुई दिल तक पहुँची तब मुझे लगा कि है ये सच मे हो रहा है मैंने उन्हें पलट के देखा कि था कि उन्हों ने लगातार सावल किये मैं उनके पहले सवाल का जवाब दे पाता तब तक उन्हों दूसरा सवाल कर दिया उनका पहला सवाल था कि यहाँ किस तलास में आये हो मैंने भी भी बिना हिचकिचाहट के उन्हें जवाब दिया कि रास्ता और जगह कोई भी मेरी तलाश तो मेरे आखों के सामने रहती है शायद वो इस जवाब को समझना नही चाहते थे और इसी लिए उन्होंने ने दूसरा सवाल भी कर दिया वो शायद1 जल्दी में थे क्योकि वो अपने सवाल का जबाब अधूरा सुने बिना ही चल दिये उन्हें ऐसे जाते देख मैं बस उन्हें एक पल ही सही पर उन्हें रोकना चाहता था मैंने भी पूछा कि मुझे तो पूछ लिया अब तुम बताओ कि किसकी तलास में यहाँ आये हो वो मुस्कुराये और बिना कुछ कहे चल दिये मैंने कुछ और सवाल किए उन्हों ने चलते चलते मुझसे दूर जाते जाते कुछ जवाब दिए मेरी सारी कोशिश के बाद वो न रुके तो मैं भी उनके दूसरी तरफ को धीरे धीरे बड़ा अभी वो ज्यादा दूर नही गए थे मैं रुका और पलट के तोड़ी देर देखा लेनिक उन्होंने पलट के नही देखा  मैंने तोड़ा और इंतजार किया लेकिन वो पलटे नही और वो बहुत दूर निकल गए और मैं सिर्फ देखता रहा  एक बार मुझे लगा कि दौड़ के जाऊ उनके पीछे और कह दु की फिर जल्दी मिले गे लेकिन ये हुआ नही

“” एक बार फिर मैं उन्हें रोक ना सका और एक बार फिर मैं उनकी आँखों के शब्द पढ़ ना सका

वो तो चले गए एक अनजानी सी उम्मीद छोड़ गए बहुत मुश्किल से भूला पाया था उनके दिल का रस्ता  वो एक बार फिर उसी रास्ते को याद दिला कर उस रास्ते की तरफ मोड़ गए”'”