स्याही

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#हद😶

 चलना मेरे बस में ना था और हमने उड़ान भर दी

खुद से ज्यादा तुझे चाह कर हमने तो हद कर दी

आप से हुई एक छोटी सी मुलाकात ने क्या कमाल कर दिया 

आये आप मेरे करीब और आप ने मेरे बदन को निढाल कर दिया

तुम अपने नए हमसफर के साथ इस कदर खोये हो कि तुम मुझे क्या याद करो गे तुमने तो खुद को भुला दिया है 

मेरे अकेले का ही सही कुछ तो रिश्ता था मेरा तुझसे क्यो की एक पल के लिए गलती से आई तेरी याद ने मेरी आँखों से आँसू गिरा दिया है

हा फर्क पड़ता था

हा फर्क पड़ता था बेवजह मुँह मोड़ते थे तो फर्क पड़ता था

बेवजह साथ छोड़ते थे तो फर्क पड़ता था

गलती उस दिन  भी फिर तुम्हरी थी  सजा मुझे मिली थी हा फर्क पड़ता था

ख्वाब तुम्हरे आवारा थे फिर भी तुम्हरी बेरूखी हमे गवारा थी हा फर्क पड़ता था 

बेइंतहा मोहब्बत हमारी थी बेइंतहा नफरत तुम्हे काबुल थी हा फर्क पड़ता था 

मैं तुम्हरी धुन में खोया था दुनिया की धुन से अंजान था तुम दुनिया की हर धुन सुनते हो सिर्फ मेरी धुन से अंजान थे हा फर्क पड़ता था

मुझे तेरा अंधेरा कबूल था तुझे मेरा उजाला भी न मंजूर था हा फर्क पड़ता था 

मुझे आप की की दूरियां भी प्यारी लगती थीं तुझे को हमारी नज़दीकियों से भी नफरत थी हा फर्क पड़ता था

हा फर्क तो  पड़ा है फिर भी दिल तुझे पाने की ज़िद में अड़ा है